विजेता जीतते है क्योंकि वे हार नहीं मानते – Vijay Shekhar Sharma, PayTm के संस्थापक

Success Story of Vijay Shekhar Sharma – founder of Indian e-commerce website Paytm, owned by One97 Communications – विजय शेखर शर्मा कंपनी का वर्तमान मूल्य 3 अरब के भी ज्यादा है।  यह कंपनी का सपना उन्होंने तब देखा था, जब उनके जेब में 10 रुपये थे और उनके संघर्ष की कहानी असाधारण है। यह सफलता के रास्ते पर उनके लिए कुछ भी आसान नहीं था। पर उनकी कहानी यह दर्शाती है कि मेहनत और ज़िद की हमेशा जीत होती है। 

Success story of Vijay Shekhar Sharma paytm founder
Vijay Shekhar Sharma , Image Credit : Hindustan Times

पहली नौकरी की शुरूवात

विजय शर्मा एक छोटे शहर से है।  वे एक साधारण परिवार से थे।  वे हाईस्कूल  की पढाई ख़त्म करके दिल्ली आगे की पढ़ाई करने आये। यहा उनको कड़ी चुनोतियो का सामना करना पड़ा। उसका मुख्य कारण उनकी अंग्रेजी कमजोर थी। पर उन्होंने हर नहीं मानी और अंग्रेजी सीखी। दिल्ली में ही उन्होंने पहली बार उद्यमी बनने का फैसला किया। उन्होंने इन्टरनेट और सॉफ्टवेयर को अपना मैदान बनाया। उसकी पहली सीढ़ी के रूप में उन्होंने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखी और एक कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम बनायीं।  इस समय के दौरान उन्होंने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में अपनी पहली नौकरी को शुरूवात की । 

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नौकरी छोड़ दी , कारोबार तबाह हुआ लेकिन हार नहीं मानी 

उन्होंने छह महीने बाद यह नौकरी छोड़ दी और अपने दोस्तों के साथ अपनी खुद की एक कंपनी का निर्माण किया। यह समय उनके जीवन का सबसे अंधेरे समय में बदल गया। उनका कारोबार तबाह हो गया। वे खुद भी दिवालिया हो गए थे।  लेकिन विजय आसानी से हार मानाने वालों मे से नहीं है। वे दिल्ली में कश्मीरी गेट के निकट एक छात्रावास में रहने लगे। ऐसा कई बार होता था की उन्हें भोजन नसीब नहीं होता था।  वे लंबी दूरी तक के चलके काम या मीटिंग के लिए जाते थे।

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वन 97 की शुरुआत , Paytm का जन्म 

हालात थोड़े बेहतर होने लगे जब उन्होंने वन 97(पेटीएम की मूल कंपनी) शुरू की। उन्होंने इंटरनेट सामग्री, विज्ञापन और वाणिज्य के तीन बुनियादी बातों के साथ प्रयोग शुरू कर दिया। लेकिन उनका बड़ा यूरेका पल 2011 में आया था जब उसने पहली बार अपने बोर्ड के सामने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश करने के लिए मना लिया। बोर्ड आश्वस्त नहीं था।  लेकिन विजय शर्मा ने बोर्ड को विश्वास दिलाया की वे सही कदम उठा रहे है। उन्होंने बोर्ड को विश्वास दिलाने के लिए अपनी २ मिलियन डॉलर की इक्विटी दाव पे लगदी। वह कहते हैं, दूसरों ने बताया हुआ काम करने में कोई मज़ा नहीं है, असली मजा तो वह काम करने में है जो लोग कहते हैं की आप वह नहीं कर सकते है।

और इस तरह पेटीएम का पहला अवतार, मोबाइल के माध्यम से भुगतान का  जन्म हुआ।  भारत में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के अगले बड़ी बात बनने के रास्ते पर तेजी से दौड़ने लगा। और उसके बाद से  विजय शर्मा ने कभी वापस मुड़के नहीं देखा। और पेटीएम भारत की एक बड़ी कंपनी बन गयी।

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